Monday, December 17, 2018

Journey of Self reliasiation

I have written my first blog at the age of 40

उम्र के चतुर्थ पड़ाव पे मैंने अपना पहला ब्लॉग लिखा था।  अब उम्र के पांचवे पड़ाव  पर मैं अपना दूसरा  ब्लॉग लिख रहा  हूँ। एक नयी यात्रा पे निकलने का समय है और शायद यही सही समय है अपने बारे में जानने के बारे में। जीवन के इस १० साल की यात्रा मैं अपने ब्लॉग में लिखना चाहता हूँ। समय यात्रा में ये १०  महत्व पूर्ण रहे। शायद इन १० साल में अपने को जानने के बारे में कुछ उत्कंठा  तीव्र हुई है।  जीवन तो जितना निकलना था निकल गया। अब तो शायद कुछ हो  नहीं सकता।  आत्म निरिक्षण के लिए बहुत सही समय है। जीवन में क्या क्या हो गया। इसका
आत्मविश्लेषण करना आवश्यक हो गया है। शायद अब समय है की अपनी नई यात्रा पे निकला जाए। यात्रा जो मुझे  मुझसे मिलाये।  यात्रा मुझको मुझसे मिलने की एक बार अपने को अपने को ढूंढ़ने की जो खो गया है इस ५०  साल के जीवन की आपा धापी में।

शुरुआत कहाँ से करूं समझ नहीं आता। शायद चतुर्थ पड़ाव से  प्रस्तावना लिखना प्रारम्भ किया। मुझे ४० से ही लिखना शुरू करना चाहिए। ४० का भी अजीब दौर था  जीवन धीरे धीरे से हाथ से से निकल रहा था। कुछ समझ नहीं आ रहा था उस वक़्त। जीवन में शायद वो समय होता है की अपने बोये हुए सामने आने लगे थे। कार्य क्षेत्र में, परिवार के सम्बन्ध में, व्यक्ति सम्बन्ध में जो भी  प्रयास  किये  होते हैं परिणाम सामने आने लगता है। प्रयास, शायद प्रयास ही एक शब्द है जो यहाँ  उचित प्रतीत नहीं  होता। प्रयास करना तो हमारे कर्म में होता है। लेकिन प्रयास से ही सब कुछ नहीं होता है। जीवन कहाँ शुरू हुआ और कहाँ समाप्त होने जा रहा है इसकी सुचना किसी इंसान को नहीं होती है। शायद भगवान् ने ये अच्छा ही किया है की इसकी भनक भी इंसान  को नहीं दी नहीं तो इंसान यह सोचते सोचते ही मर जाता | शायद २ साल पहले से शुरू करूँ शायद उचित होगा क्यूंकि १० साल पुरानी बात से आज का तारतम्य बनाने में बहुत प्रयास करना पड़ेगा |
अपने पिछले २ साल का विश्लेषण करूँ तो शायद मेरी ज़िन्दगी के सबसे अच्छे वर्षों में से ये सबसे अच्छे थे. | हाँ शायद  सबसे अच्छे थे, पर अब उसके बारे में ज़िक्र कर के क्या होगा। अब तो सब समाप्त हो गया | जीवन तो निकल गया | वैसे कहते है की जो समय निकल जाए वो  सबसे अच्छा होता है। बस हम उसे समय को वर्तमान एवं भूतकाल से तुलना करते रहते  हैं | समय एक बह्ती नदि है जो बह्ती  रह्ती  है। इसके साथ बहना ही शयाद  जीवन है। जीवन का एक समय यह भि आया कि यह समझ आ रहा था कि क्या करूँ । बड़े लोग कैसे इतने बड़े बड़े फैसले ले लेते हैं |  बस जीवन के खराब समय मे सही निर्णय लेना हि उनकी पह्चान है।


मुझे एक बार किसी ने बोला था सबसे कठिन कार्य जीना है





















हम  क्या आशाएं लगा के रहते हैं | शायद यह



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